NASA vs ISRO Facts in Hindi: जानिये 100+ अद्भुत तथ्य, बजट, इतिहास और भविष्य के मिशन। पढ़ें NASA और ISRO की पूरी तुलना और स्पेस साइंस के अनसुने किस्से।
NASA और ISRO: अंतरिक्ष विज्ञान के 100+ रोचक तथ्य और इतिहास (NASA vs ISRO Facts in Hindi)
अंतरिक्ष अन्वेषण की दुनिया में NASA (National Aeronautics and Space Administration) और ISRO (Indian Space Research Organisation) दो सबसे बड़ी शक्तियां हैं। जहाँ नासा अपने विशाल बजट और डीप स्पेस मिशन के लिए जाना जाता है, वहीं इसरो अपनी किफायती तकनीक और सटीक इंजीनियरिंग के लिए प्रसिद्ध है। आइये जानते हैं इन दोनों से जुड़े बेहतरीन तथ्यों के बारे में।
1. NASA और ISRO का ऐतिहासिक सहयोग (Collaboration Facts)
यह खंड दोनों एजेंसियों के बीच बढ़ते रिश्तों पर केंद्रित है।
- NISAR मिशन: नासा और इसरो मिलकर NISAR (NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar) बना रहे हैं, जो दुनिया का सबसे महंगा अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट होगा।
- Artemis Accords: भारत ने हाल ही में नासा के ‘आर्टेमिस अकॉर्ड्स’ पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका उद्देश्य चंद्रमा पर शांतिपूर्ण अन्वेषण करना है।
- अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण: नासा, इसरो के अंतरिक्ष यात्रियों को अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के मिशन के लिए प्रशिक्षित करने में मदद कर रहा है।
- चंद्रयान-1 और नासा: भारत के पहले चंद्र मिशन, चंद्रयान-1 में नासा का ‘M3’ (Moon Mineralogy Mapper) उपकरण लगा था, जिसने ही चाँद पर पानी की खोज की पुष्टि की थी।
- मंगल मिशन में मदद: जब इसरो ने मंगलयान (MOM) लॉन्च किया, तो नासा के ‘डीप स्पेस नेटवर्क’ ने ट्रैकिंग और संचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
2. ISRO: भारत की अंतरिक्ष शक्ति (ISRO Facts)
इसरो ने कम संसाधनों में दुनिया को चौंकाया है। यहाँ इसरो से जुड़े अद्भुत तथ्य हैं:
इतिहास और शुरुआत
- साइकिल और बैलगाड़ी: इसरो के शुरुआती दिनों में रॉकेट के हिस्सों को साइकिल और बैलगाड़ियों पर ले जाया जाता था।
- पहला रॉकेट: भारत का पहला रॉकेट 1963 में थुम्बा (केरल) से लॉन्च किया गया था, जो एक चर्च (सेंट मैरी मैग्डालीन) के परिसर से संचालित हुआ था।
- विक्रम साराभाई: डॉ. विक्रम साराभाई को भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक माना जाता है।
- आर्यभट्ट: भारत का पहला उपग्रह ‘आर्यभट्ट’ 1975 में सोवियत संघ की मदद से लॉन्च किया गया था।
- SLV-3: भारत का अपना पहला सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SLV-3) डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के नेतृत्व में विकसित किया गया था।
विश्व रिकॉर्ड और उपलब्धियां
- 104 सैटेलाइट्स का रिकॉर्ड: 2017 में, इसरो ने PSLV-C37 के जरिए एक साथ 104 उपग्रह लॉन्च करके वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था।
- मंगलयान (MOM): भारत पहले ही प्रयास में मंगल की कक्षा में पहुंचने वाला दुनिया का पहला देश बना।
- हॉलीवुड से सस्ता: इसरो के मंगलयान का बजट (लगभग 450 करोड़ रुपये) हॉलीवुड फिल्म ‘ग्रेविटी’ के बजट से भी कम था।
- चंद्रयान-3: भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव (South Pole) पर सफलतापूर्वक लैंड करने वाला दुनिया का पहला देश है।
- सबसे भरोसेमंद रॉकेट: इसरो का PSLV (Polar Satellite Launch Vehicle) दुनिया के सबसे विश्वसनीय रॉकेट्स में से एक माना जाता है।
- NavIC: भारत के पास अपनी खुद की जीपीएस प्रणाली है जिसे NavIC (Navigation with Indian Constellation) कहा जाता है।
- महिला शक्ति: इसरो के कई मिशनों, जैसे चंद्रयान और मंगलयान में महिला वैज्ञानिकों (जैसे रितु करिधाल) ने प्रोजेक्ट डायरेक्टर के रूप में नेतृत्व किया है।
- भुवन (Bhuvan): यह इसरो का अपना गूगल मैप्स जैसा वर्जन है जो भारत का 3D व्यू देता है।
- Vikas Engine: इसरो के लिक्विड रॉकेट इंजन का नाम ‘विकास’ है, जो विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया है।
- कमर्शियल आर्म: NSIL (NewSpace India Limited) इसरो की कमर्शियल शाखा है जो दूसरे देशों के सैटेलाइट्स लॉन्च करके पैसे कमाती है।
3. NASA: अंतरिक्ष अन्वेषण का अगुवा (NASA Facts)
नासा ने मानव इतिहास के सबसे बड़े मिशनों को अंजाम दिया है।
ऐतिहासिक उपलब्धियां
- स्थापना: नासा की स्थापना 1958 में अमेरिकी राष्ट्रपति ड्वाइट डी. आइजनहावर ने की थी।
- चाँद पर इंसान: 1969 में अपोलो 11 मिशन के जरिए नासा ने पहली बार इंसान (नील आर्मस्ट्रांग) को चाँद पर उतारा।
- गोल्डन रिकॉर्ड: नासा के वॉयजर (Voyager) मिशन में एक सोने का रिकॉर्ड भेजा गया है, जिसमें पृथ्वी की आवाजें और तस्वीरें हैं, ताकि अगर कोई एलियन मिले तो वे हमारे बारे में जान सकें।
- हबल टेलीस्कोप: हबल ने हमें ब्रह्मांड की वो तस्वीरें दिखाईं जिन्होंने खगोल विज्ञान को बदल दिया।
- जेम्स वेब: यह नासा का अब तक का सबसे शक्तिशाली टेलीस्कोप है जो समय में पीछे (Time Travel via light) देख सकता है।
तकनीक और बजट
- स्पेस सूट की कीमत: नासा के एक पूर्ण स्पेस सूट की कीमत लगभग 12 मिलियन डॉलर (100 करोड़ रुपये से अधिक) होती है।
- इंटरनेट स्पीड: नासा के “ESnet” की इंटरनेट स्पीड आम दुनिया की तुलना में हजारों गुना तेज (91 गीगाबिट्स प्रति सेकंड तक) होती है।
- पेन का मिथक: यह सच नहीं है कि नासा ने स्पेस पेन बनाने में लाखों खर्च किए और रूस ने पेंसिल इस्तेमाल की। पेंसिल की ग्रेफाइट धूल शून्य गुरुत्वाकर्षण (Zero Gravity) में खतरनाक हो सकती है, इसलिए फिशर स्पेस पेन (निजी कंपनी द्वारा) विकसित किया गया था।
- सौर मंडल के बाहर: नासा का वॉयजर-1 मानव निर्मित एकमात्र ऐसी वस्तु है जो हमारे सौर मंडल की सीमा (Interstellar Space) को पार कर चुकी है।
- मंगल पर हेलीकॉप्टर: नासा ने ‘Ingenuity’ नामक एक छोटा हेलीकॉप्टर मंगल ग्रह पर उड़ाया, जो दूसरी दुनिया में पहली संचालित उड़ान थी।
4. NASA vs ISRO: एक तुलनात्मक दृष्टि (Comparison)
NASA vs ISRO Comparison
| विशेषता (Feature) | NASA (अमेरिका) | ISRO (भारत) |
|---|---|---|
| स्थापना | 1958 | 1969 |
| मुख्यालय | वाशिंगटन डी.सी. | बेंगलुरु |
| सालाना बजट (अनुमानित) | $25 बिलियन+ | $1.5 – $2 बिलियन |
| प्रमुख रॉकेट्स | Saturn V, SLS, Falcon 9* | PSLV, GSLV (LVM3), SSLV |
| भविष्य के मिशन | Artemis (Moon), Mars Sample Return | Gaganyaan (Human), Shukrayaan |
| मुख्य फोकस | डीप स्पेस, रिसर्च, मानव मिशन | किफायती लॉन्च, रिमोट सेंसिंग |
| लॉन्च पैड | कैनेडी स्पेस सेंटर | सतीश धवन स्पेस सेंटर (श्रीहरिकोटा) |
| मंगल मिशन लागत | MAVEN ($671 मिलियन) | Mangalyaan ($74 मिलियन) |
5. भविष्य के मिशन और अन्य रोचक तथ्य (Fast Facts)
- गगनयान: यह इसरो का पहला मानव मिशन होगा, जिसमें 3 भारतीय अंतरिक्ष में जाएंगे।
- लूनर गेटवे: नासा चाँद की कक्षा में एक स्पेस स्टेशन बना रहा है।
- शुक्रयान: इसरो शुक्र ग्रह (Venus) के लिए एक मिशन की योजना बना रहा है।
- सूर्य मिशन: नासा का ‘पार्कर सोलर प्रोब’ सूर्य को “छूने” वाला (कोरोना में प्रवेश करने वाला) पहला यान है।
- आदित्य-L1: इसरो का पहला सूर्य मिशन ‘आदित्य-L1’ सफलतापूर्वक लैग्रेंज पॉइंट 1 पर पहुंच चुका है।
- RLV-TD: इसरो दोबारा इस्तेमाल होने वाले रॉकेट (Reusable Launch Vehicle) बना रहा है, जैसे स्पेस शटल।
- नासा का मोटो: “For the Benefit of All.”
- इसरो का मोटो: “Space technology in the Service of Humankind.”
- स्पेस डेब्रिस (कचरा): दोनों एजेंसियां अंतरिक्ष के मलबे को ट्रैक करने और कम करने पर काम कर रही हैं।
- इंटरनेट ऑन मून: नासा चाँद पर 4G/LTE नेटवर्क स्थापित करने की योजना बना रहा है।
- SSPN: इसरो खुद का स्पेस स्टेशन 2035 तक बनाने का लक्ष्य रखता है।
- नासा का नामकरण: नासा के रोवर्स का नाम अक्सर छात्रों द्वारा आयोजित प्रतियोगिताओं से रखा जाता है (जैसे ‘Perseverance’)।
- इसरो के रॉकेट पेंट: इसरो के रॉकेट अधिकतर सफेद होते हैं ताकि वे गर्मी को रिफ्लेक्ट कर सकें।
- लॉन्च का स्थान: इसरो के रॉकेट पूर्वी तट (श्रीहरिकोटा) से लॉन्च होते हैं ताकि पृथ्वी की घूर्णन गति (Rotation) का लाभ मिल सके।
- साउंडिंग रॉकेट्स: इसरो अभी भी वायुमंडलीय अध्ययन के लिए छोटे ‘साउंडिंग रॉकेट’ लॉन्च करता है।
- प्लैनेटरी डिफेंस: नासा ने DART मिशन के जरिए एक एस्टेरॉयड से टक्कर कराकर उसकी दिशा बदलने में सफलता पाई।
- SPADEX: इसरो का आगामी मिशन जो अंतरिक्ष में दो उपग्रहों को जोड़ने (Docking) का परीक्षण करेगा।
- X-59: नासा एक ‘शांत’ सुपरसोनिक विमान (Quiet Supersonic Tech) बना रहा है।
- SSLV: इसरो ने छोटे सैटेलाइट्स के लिए Small Satellite Launch Vehicle (SSLV) विकसित किया है।
- भारतीय मूल के लोग: नासा में 30% से अधिक वैज्ञानिक और कर्मचारी भारतीय मूल के या एशियाई माने जाते हैं (यह आंकड़ा अक्सर चर्चा में रहता है, हालांकि आधिकारिक संख्या भिन्न हो सकती है)।
6. अंतरिक्ष जीवन और अजीबोगरीब तथ्य (Space Life & Weird Facts)
अंतरिक्ष में जीवन पृथ्वी से बिल्कुल अलग होता है।
- पेशाब से पानी: अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर पानी इतना कीमती है कि वहां अंतरिक्ष यात्रियों के पेशाब (Urine) को फिल्टर करके पीने योग्य पानी में बदला जाता है।
- कद बढ़ना: अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण (Gravity) कम होने के कारण रीढ़ की हड्डी फैलती है, जिससे अंतरिक्ष यात्रियों का कद 2 इंच तक बढ़ सकता है।
- नाखून गिरना: स्पेस सूट के दस्ताने इतने सख्त होते हैं कि काम करते समय दबाव के कारण कभी-कभी अंतरिक्ष यात्रियों के नाखून निकल जाते हैं।
- अंतरिक्ष की गंध: कई अंतरिक्ष यात्रियों ने बताया है कि स्पेस वॉक के बाद उनके सूट से “जले हुए स्टेक” या “बारूद” जैसी गंध आती है।
- स्नूपी (Snoopy): कार्टून चरित्र ‘स्नूपी’ नासा का सुरक्षा शुभंकर (Mascot) है। सिल्वर स्नूपी अवॉर्ड नासा के कर्मचारियों को सुरक्षा में योगदान के लिए दिया जाता है।
- आंसू नहीं गिरते: जीरो ग्रेविटी में अगर आप रोते हैं, तो आंसू गालों से नीचे नहीं गिरते, बल्कि आंख के पास ही पानी का बुलबुला बन जाते हैं।
- जुड़वा भाई: नासा ने ‘Twin Study’ की थी जिसमें एक भाई (स्कॉट केली) अंतरिक्ष में रहा और दूसरा (मार्क केली) पृथ्वी पर, ताकि शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों की तुलना की जा सके।
- सनराइज: ISS पृथ्वी का चक्कर इतनी तेजी से लगाता है कि वहां रहने वाले अंतरिक्ष यात्री दिन में 16 बार सूर्योदय और सूर्यास्त देखते हैं।
- स्पेस पेन: फिशर स्पेस पेन किसी भी कोण पर, पानी के नीचे और शून्य गुरुत्वाकर्षण में लिख सकता है।
- डायनासोर अंतरिक्ष में: नासा ने एक बार डायनासोर की हड्डी (मैयासाउरा) को स्पेस शटल मिशन पर अंतरिक्ष में भेजा था।
7. संघर्ष और असफलताएं (Failures & Struggles)
सफलता हमेशा आसानी से नहीं मिली। नासा और इसरो दोनों ने बुरे दौर देखे हैं।
- SLV-3 की विफलता: भारत के पहले लॉन्च व्हीकल SLV-3 की पहली उड़ान (1979) विफल रही थी और सैटेलाइट समुद्र में गिर गया था। डॉ. कलाम ने इसकी जिम्मेदारी ली थी।
- चैलेंजर आपदा: 1986 में नासा का स्पेस शटल ‘चैलेंजर’ लॉन्च के 73 सेकंड बाद ही फट गया था, जिसमें 7 अंतरिक्ष यात्री मारे गए थे।
- कोलंबिया हादसा: 2003 में स्पेस शटल ‘कोलंबिया’ पृथ्वी पर लौटते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें भारतीय मूल की कल्पना चावला सहित 7 यात्री शहीद हुए।
- जासूसी कांड: 90 के दशक में इसरो के वैज्ञानिक नम्बी नारायणन को झूठे जासूसी केस में फंसाया गया था, जिससे भारत की क्रायोजेनिक इंजन तकनीक 20 साल पीछे चली गई।
- हबल की धुंधली आंख: जब हबल टेलीस्कोप पहली बार लॉन्च हुआ, तो उसका लेंस थोड़ा गलत बना था जिससे तस्वीरें धुंधली आ रही थीं। बाद में अंतरिक्ष में जाकर इसे ठीक किया गया।
- लैंडर विक्रम: चंद्रयान-2 का लैंडर ‘विक्रम’ चाँद की सतह से मात्र 2.1 किमी दूर क्रैश हो गया था, लेकिन ऑर्बिटर अभी भी काम कर रहा है।
- अपोलो 13: “ह्यूस्टन, वी हैव अ प्रॉब्लम” (Houston, we have a problem) – यह प्रसिद्ध वाक्य अपोलो 13 मिशन का है, जब ऑक्सीजन टैंक फटने के बाद भी नासा ने अपने यात्रियों को सुरक्षित वापस बुला लिया था।
- जीएसएलवी (GSLV) की दिक्कतें: इसरो के GSLV रॉकेट को अक्सर “Naughty Boy” कहा जाता था क्योंकि शुरुआती दिनों में इसके क्रायोजेनिक चरण में कई विफलताएं मिली थीं।
- मार्स पोलर लैंडर: 1999 में नासा का एक मार्स मिशन इसलिए फेल हो गया क्योंकि इंजीनियरों ने मीट्रिक और इम्पीरियल (इंच/फुट vs मीटर) यूनिट्स में कन्फ्यूजन कर दिया था।
- सीमित बजट: इसरो के वैज्ञानिकों को अक्सर कम संसाधनों में काम करना पड़ता है, जो उन्हें ‘जुगाड़’ या ‘फ्रुगल इंजीनियरिंग’ में माहिर बनाता है।
8. तकनीक और इनोवेशन (Tech & Innovation)
वे अविष्कार जो स्पेस के लिए बने लेकिन अब हम भी इस्तेमाल करते हैं।
- मेमोरी फोम: आपके गद्दों और तकियों में इस्तेमाल होने वाला ‘मेमोरी फोम’ नासा ने अंतरिक्ष यात्रियों की सीटों के लिए बनाया था।
- कैमरा फोन: आज के मोबाइल कैमरों में इस्तेमाल होने वाली CMOS सेंसर तकनीक की शुरुआत नासा की जेट प्रोपल्शन लैब (JPL) में हुई थी।
- स्क्रैच-रेसिस्टेंट लेंस: चश्मों पर लगने वाला स्क्रैच-प्रूफ कोटिंग अंतरिक्ष यात्रियों के हेलमेट वाइज़र को बचाने के लिए विकसित किया गया था।
- इंसुलिन पंप: डायबिटीज मरीजों के लिए इंसुलिन पंप की तकनीक नासा के रोबोटिक आर्म तकनीक से प्रेरित है।
- वॉटर फिल्टर: पानी साफ करने की आधुनिक तकनीक अपोलो मिशन के लिए बनाई गई थी ताकि अंतरिक्ष में बैक्टीरिया मारे जा सकें।
- वायरलेस हेडसेट: पायलटों के लिए हल्के वायरलेस हेडसेट नासा की ही देन हैं।
- इसरो का लिथियम-आयन: इसरो ने अपनी रॉकेट बैटरी तकनीक (Li-ion) को अब भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियों को देना शुरू कर दिया है।
- 3D प्रिंटिंग: नासा अब अंतरिक्ष में ही पार्ट्स बनाने के लिए 3D प्रिंटिंग का परीक्षण कर रहा है ताकि पृथ्वी से सामान न ले जाना पड़े।
- वेल्क्रो (Velcro): हालांकि वेल्क्रो नासा ने नहीं खोजा, लेकिन अपोलो मिशन में इसके अत्यधिक उपयोग ने इसे दुनिया भर में लोकप्रिय बना दिया।
- फायरप्रूफ पेंट: नासा ने गर्मी रोधक पेंट बनाया था, जिसका उपयोग अब ऊंची इमारतों में आग से सुरक्षा के लिए होता है।
9. इसरो और नासा के अनसुने किस्से (Hidden Trivia)
- “विकास” इंजन का नाम: इसरो के लिक्विड इंजन ‘VIKAS’ का नाम विक्रम साराभाई के नाम पर है (VIKram A Sarabhai)।
- सतीश धवन की महानता: 1979 में जब पहला मिशन फेल हुआ, तो सतीश धवन ने मीडिया के सामने असफलता की जिम्मेदारी ली। अगले साल जब मिशन सफल हुआ, तो उन्होंने कलाम साहब को श्रेय लेने के लिए आगे कर दिया।
- चाँद पर गोल्फ: अपोलो 14 के अंतरिक्ष यात्री एलन शेपर्ड ने चाँद पर गोल्फ खेला था।
- भुवन एप: गूगल अर्थ से पहले, इसरो ने ‘भुवन’ बनाया था जो भारतीय सीमाओं और शहरों का सटीक डेटा देता है।
- ध्वनि की गति से तेज: नासा का X-43A विमान ध्वनि की गति से 9.6 गुना तेज (Mach 9.6) उड़ चुका है।
- गोल्डन रिकॉर्ड की आवाजें: वॉयजर के गोल्डन रिकॉर्ड में हिंदी, बंगाली, और मराठी सहित 55 भाषाओं में “नमस्ते” संदेश रिकॉर्ड है।
- इसरो का कमर्शियल रिकॉर्ड: इसरो ने अब तक 30 से अधिक देशों के 400+ विदेशी सैटेलाइट्स लॉन्च किए हैं।
- इंटरनेट स्पीड: ISS से डेटा ट्रांसमिशन की स्पीड 600 Mbps तक हो सकती है।
- स्पेस का तापमान: सूरज की रोशनी में स्पेस सूट का तापमान 120°C और छाया में -150°C तक जा सकता है।
- एप्पल और इसरो: एप्पल के iPhone 14 और बाद के मॉडल्स में इसरो के NavIC नेविगेशन सिस्टम का सपोर्ट दिया गया है।
10. भारत का नया स्पेस युग (New Space Era of India)
- प्राइवेट रॉकेट: ‘स्काईरूट एयरोस्पेस’ भारत की पहली निजी कंपनी बनी जिसने अपना रॉकेट ‘विक्रम-एस’ लॉन्च किया।
- अग्निकुल कॉसमॉस: यह भारतीय स्टार्टअप दुनिया का पहला 3D प्रिंटेड रॉकेट इंजन बना रहा है।
- स्पेस टूरिज्म: इसरो और निजी कंपनियां 2030 तक स्पेस टूरिज्म (अंतरिक्ष पर्यटन) शुरू करने की योजना बना रही हैं।
- IS4OM: इसरो ने अंतरिक्ष मलबे (Space Debris) को ट्रैक करने के लिए IS4OM सिस्टम बंगलुरु में स्थापित किया है।
- स्पेस डॉकिंग: इसरो ने ‘SPADEX’ मिशन प्लान किया है जिसमें दो सैटेलाइट अंतरिक्ष में जुड़ेंगे (Docking), जो भविष्य के स्पेस स्टेशन के लिए जरुरी है।
- IN-SPACe: भारत सरकार ने IN-SPACe नामक संस्था बनाई है जो प्राइवेट कंपनियों को इसरो की सुविधाओं का उपयोग करने की अनुमति देती है।
- रियूजेबल रॉकेट: इसरो RLV (Reusable Launch Vehicle) का सफल परीक्षण कर चुका है जो रनवे पर विमान की तरह लैंड करता है।
- क्वांटम संचार: इसरो ने हाल ही में सुरक्षित संचार के लिए ‘क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन’ (Quantum Key Distribution) का सफल प्रदर्शन किया।
- सबसे भारी रॉकेट: इसरो का LVM3 (बाहुबली) अब तक का सबसे शक्तिशाली भारतीय रॉकेट है, जो 4000 किलोग्राम पेलोड जीटीओ तक ले जा सकता है।
- आत्मनिर्भरता: नासा की तरह इसरो अब अपने अधिकतर कंपोनेंट्स (जैसे एटॉमिक क्लॉक) भारत में ही बनाता है, जिससे विदेशी निर्भरता खत्म हो गई है।
निष्कर्ष (Conclusion) :
NASA और ISRO दोनों ही मानवता के लिए कार्य कर रहे हैं। जहाँ नासा सीमाओं को आगे बढ़ा रहा है (Pushing Boundaries), वहीं इसरो यह साबित कर रहा है कि स्पेस साइंस केवल अमीर देशों के लिए नहीं है। ये 100 तथ्य बताते हैं कि अंतरिक्ष विज्ञान कितना रोमांचक और चुनौतीपूर्ण है।
FAQs: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1: क्या ISRO नासा से बेहतर है?
A: “बेहतर” कहना मुश्किल है। बजट और टेक्नोलॉजी में नासा बहुत आगे है, लेकिन “कॉस्ट-इफेक्टिवनेस” (किफायत) और सफलता दर (Success Rate) में इसरो दुनिया में सबसे बेहतरीन है।
Q2: नासा और इसरो मिलकर कौन सा बड़ा काम कर रहे हैं?
A: वे NISAR सैटेलाइट पर काम कर रहे हैं, जो पृथ्वी के बदलते पारिस्थितिकी तंत्र, बर्फ के पिघलने और भूकंप जैसी घटनाओं पर नजर रखेगा।
Q3: क्या इसरो कभी इंसान को स्पेस में भेजेगा?
A: जी हाँ, इसरो अपने ‘गगनयान’ (Gaganyaan) मिशन के तहत 2024-25 के आसपास भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी कर रहा है।
Q4: चंद्रयान-3 की सफलता क्यों खास थी?
A: क्योंकि भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव (South Pole) के पास उतरने वाला दुनिया का पहला देश बना, जहाँ पानी (बर्फ के रूप में) होने की सबसे ज्यादा संभावना है।
Q5: नासा का बजट इसरो से कितना ज्यादा है?
A: नासा का बजट इसरो के बजट से लगभग 10 से 15 गुना अधिक होता है।
NASA vs ISRO Facts in Hindi