श्री पद्मा पुराण अध्याय 1 | Padma Purana Chapter 1 in Hindi

ग्रन्थ का उपक्रम तथा इसके स्वरूप का परिचय स्वच्छं चन्द्रावदातं करिकरमकरक्षोभसंजातफेर्न ब्रह्मोद्धूतिप्रसक्तैव्रतनियमपरैः सेवितं विप्रमुख्यैः । ॐकारालङ्कृतेन त्रिभुवनगुरुणा ब्रह्मणा दृष्टिपूर्त संभोगाभोगरम्यं जलमशुभहरं पौष्करं नः पुनातु ॥ श्रीव्यासजीके शिष्य परम बुद्धिमान् लोमहर्षणजीने एकान्तमें बैठे हुए [अपने पुत्र] उग्रश्रवा नामक सूतसे कहा – “बेटा ! तुम ऋषियोंके आश्रमोंपर जाओ और उनके पूछनेपर सम्पूर्ण धर्मोका वर्णन करो। तुमने मुझसे