नैमिषारण्य में सूतजी का आगमन, ‘पुराण का आरम्भ तथा सृष्टि का वर्णन
पूर्वकाल की बात है, परम पुण्यमय पवित्र नैमिषारण्य क्षेत्र बड़ा मनोहर जान पड़ता था। वहाँ बहुत-से मुनि एकत्रित हुए थे, भाँति-भाँति के पुष्प उस स्थान की शोभा बढ़ा रहे थे। पीपल, पारिजात, चन्दन, अगर, गुलाब तथा चम्पा आदि अन्य बहुत-से वृक्ष उसकी शोभा वृद्धि में सहायक हो रहे थे। भाँति-भाँति के पक्षी, नाना प्रकार के