नैमिषारण्य में सूतजी का आगमन, ‘पुराण का आरम्भ तथा सृष्टि का वर्णन

पूर्वकाल की बात है, परम पुण्यमय पवित्र नैमिषारण्य क्षेत्र बड़ा मनोहर जान पड़ता था। वहाँ बहुत-से मुनि एकत्रित हुए थे, भाँति-भाँति के पुष्प उस स्थान की शोभा बढ़ा रहे थे। पीपल, पारिजात, चन्दन, अगर, गुलाब तथा चम्पा आदि अन्य बहुत-से वृक्ष उसकी शोभा वृद्धि में सहायक हो रहे थे। भाँति-भाँति के पक्षी, नाना प्रकार के

श्री पद्मा पुराण अध्याय 1 | Padma Purana Chapter 1 in Hindi

ग्रन्थ का उपक्रम तथा इसके स्वरूप का परिचय स्वच्छं चन्द्रावदातं करिकरमकरक्षोभसंजातफेर्न ब्रह्मोद्धूतिप्रसक्तैव्रतनियमपरैः सेवितं विप्रमुख्यैः । ॐकारालङ्कृतेन त्रिभुवनगुरुणा ब्रह्मणा दृष्टिपूर्त संभोगाभोगरम्यं जलमशुभहरं पौष्करं नः पुनातु ॥ श्रीव्यासजीके शिष्य परम बुद्धिमान् लोमहर्षणजीने एकान्तमें बैठे हुए [अपने पुत्र] उग्रश्रवा नामक सूतसे कहा – “बेटा ! तुम ऋषियोंके आश्रमोंपर जाओ और उनके पूछनेपर सम्पूर्ण धर्मोका वर्णन करो। तुमने मुझसे

Shiv Mahapuran Adhyay 1 – कथा, महत्व और सार | Shiv Mahapuran Chapter 1 in Hindi

Shiv Mahapuran के अध्याय 1 का सरल सार, कथा, महत्व और मुख्य शिक्षाएँ जानें। अध्याय 1 में ब्रह्मांड की उत्पत्ति, शिव तत्त्व और सृष्टि के रहस्यों का विस्तार मिलता है। पूरी जानकारी हिंदी में। शौनकजी के साधनविषयक प्रश्न करने पर सूतजी का उन्हें शिवमहापुराण की महिमा सुनाना श्रीशौनकजी बोले-हे महाज्ञानी सूतजी । सम्पूर्ण सिद्धान्तोंके ज्ञाता