क्या है अमिट स्याही?
“अमिट स्याही” शब्द का शाब्दिक अर्थ है ऐसी स्याही जो आसानी से नहीं मिटती।
निर्वाचन (मतदान) के समय मतदाता की उँगली पर एक स्याही‑चिन्ह लगाया जाता है ताकि दो बार मतदान न हो सके — यही इस स्याही का मुख्य काम है।
अमीट स्याही : क्यों और कब इसका उपयोग हुआ?
जब भारत में पहली बार साल 1951‑52 में चुनाव हुए थे, उस समय दोहरा मतदान (एक व्यक्ति द्वारा दो बार वोट देना) एक समस्या बनी थी।
इसके बाद निर्णय लिया गया कि मतदान के समय मतदाता की उँगली पर निशान लगना चाहिए, जिससे यह पता चले कि उसने मतदान कर दिया है।
इस तरह से अमिट स्याही का चुनाव प्रक्रिया में इस्तेमाल शुरू हुआ।
अमीट स्याही कैसे बनती है? (Chemical Composition)
मुख्य घटक:
अमीट स्याही का मुख्य रासायनिक तत्व होता है —
✔ Silver Nitrate (चाँदी का नाइट्रेट)
यह त्वचा की ऊपरी परत Keratin के साथ प्रतिक्रिया करके काला/नीला निशान पैदा करता है जिसे आसान तरीकों से मिटाया नहीं जा सकता।
अन्य तत्व:
Solvent (आसानी से फैलने के लिए)
Dye (रंग देने के लिए)
Alcohol (Drying agent)
Stabilizers
Violet dye (चुनावी स्याही के लिए)
प्रतिक्रिया कैसे होती है?
Silver Nitrate + Sunlight → त्वचा पर स्थायी काला निशान
इस प्रक्रिया को photo-chemical reaction कहा जाता है।
अमीट स्याही कैसे काम करती है?
- इसे मतदाता की उंगली पर लगाया जाता है।
- स्याही त्वचा की ऊपरी परत में absorb होती है।
- सूर्य के प्रकाश और हवा के संपर्क में आकर काला/गहरा रंग बनता है।
- त्वचा की dead layer हटने तक (7–15 दिन) निशान बना रहता है।
इसे nail polish, bleach, acid या detergent से भी जल्दी हटाना संभव नहीं है।
अमीट स्याही उपयोग कैसे होता है?
मतदान केन्द्र पर जब मतदाता वोट देने जाता है, तो उसकी बायीं तर्जनी (उँगली) पर अमिट स्याही का चिन्ह लगाया जाता है।
यह चिन्ह उस वक्त तक रहता है कि नए त्वचा कोशिकाएं निकलें — अर्थात् कुछ समय के लिए सुरक्षित रहता है।
यदि कोई मतदाता पहले से इस चिन्ह को हटाने की कोशिश करता है या स्याही कमज़ोर दिखती है, तो मतदान अधिकारी द्वारा पुनः स्याही लगाई जा सकती है।
अमीट स्याही क्यों महत्वपूर्ण है?
यह डबल वॉर्टिंग (एक व्यक्ति द्वारा दो‑बार वोट देना) जैसे मतदान संबंधी धोखाधड़ी को रोकने में मदद करता है।
मतदान प्रक्रिया की विश्वसनीयता बढ़ाता है — मतदाता यह जान सके कि वो केवल एक बार ही वोट दे रहा है।
तकनीकी रूप से सरल और लागत‑प्रभावी उपाय है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ मतदाता पहचान प्रणाली पूरी तरह विकसित नहीं है।
अमीट स्याही : कुछ रोचक तथ्य
यह तकनीक भारत में 1962 के आम चुनावों से इस्तेमाल हो रही है।
यही स्याही भारत में ही नहीं बनी जाती बल्कि विश्व के लगभग 28‑30 देशों द्वारा भी इस्तेमाल की जा रही है।
निर्माण का सूत्र गुप्त रखा गया है — सार्वजनिक रूप से फॉर्मूला नहीं बताया गया है।
चुनौतियाँ / ध्यान देने योग्य बातें
यदि स्याही समय पर सूख ना पाये या मतदाता की उँगली पर कोई चिकनाई/तेल लगी हो, तो चिन्ह अस्पष्ट हो सकता है — जिससे फिर से स्याही लगानी पड़ सकती है।
हालांकि यह स्याही काफी टिकाऊ होती है, लेकिन तुरंत पूरी तरह स्थायी नहीं—त्वचा की नयी कोशिकाओं के निकलने पर यह धीरे‑धीरे हट जाती है।
FAQs – अमीट स्याही से जुड़े आम प्रश्न
Q1. अमीट स्याही क्या होती है?
यह ऐसी स्याही है जो एक बार लगने के बाद कई दिनों तक नहीं मिटती।
Q2. चुनाव में अमीट स्याही क्यों लगाई जाती है?
ताकि कोई व्यक्ति दो बार वोट न डाल सके।
Q3. अमीट स्याही कितने समय तक रहती है?
7 से 15 दिन तक, त्वचा की प्रकृति पर निर्भर करता है।
Q4. क्या अमीट स्याही हानिकारक है?
सामान्यतः नहीं, लेकिन संवेदनशील त्वचा पर हल्की जलन हो सकती है।
Q5. क्या अमीट स्याही को पूरी तरह मिटाया जा सकता है?
तुरंत नहीं, यह त्वचा की dead layer के साथ धीरे-धीरे हटती है।
Q6. क्या यह बच्चों पर सुरक्षित है?
इसे केवल वयस्कों और जरूरी जगहों पर ही उपयोग करना चाहिए।
Q7. क्या अमीट स्याही waterproof होती है?
हाँ, यह पानी से नहीं मिटती और काफी समय तक बनी रहती है।