प्रेरणादायक कहानी – मिट्टी का दीपक | Prernadayak Kahani in Hindi

“मिट्टी का दीपक”

एक छोटे से गाँव में आरव नाम का लड़का रहता था। वह बेहद गरीब परिवार से था, लेकिन उसके सपने आसमान जितने बड़े थे।
गाँव का स्कूल छोटा था, पर उसके अंदर सीखने की तीव्र चाहत बहुत बड़ी थी।

संघर्ष की शुरुआत

हर सुबह आरव 4 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाता था। उसके पास स्कूल बैग भी नहीं था—बस किताबें एक पुराने थैले में रख लेता था।
कई बार रास्ते में लोग उसे चिढ़ाते, लेकिन वह मुस्कुरा कर कहता—

“मेरे सपनों की कीमत तुम नहीं समझोगे।”

स्कूल में वह सवाल इतने पूछता कि शिक्षक भी उसके उत्साह से प्रभावित थे।


एक दुर्घटना जिसने सब बदल दिया

एक दिन उसके घर में आग लग गई। उसका घर, सामान, किताबें—सब जलकर राख हो गया।
आरव रोने लगा, क्योंकि उसे लगा अब वह पढ़ाई छोड़ देगा।

गाँव वाले बोले—
“अब पढ़ाई कौन करेगा? काम करो, घर चलाओ।”

लेकिन उसका दिल कह रहा था—
“शुरुआत फिर से की जा सकती है।”


मिट्टी का दीपक — उम्मीद की लौ

उसकी माँ ने उसे समझाया और घर के बगल में बैठकर कहा—

“बेटा, मिट्टी का दीपक भी अंधेरे में रोशनी देता है।
तुम तो इंसान हो, तुम्हारी रोशनी तो खुद तुम्हारी मेहनत से निकलेगी।”

इन बातों ने आरव के दिल में नई आग जला दी।

उसने घरवालों का सहारा बनने के लिए शाम को खेतों में काम करना शुरू किया और सुबह फिर से स्कूल जाने लगा।


मेहनत का फल

आरव रात में मिट्टी के बने छोटे दीपक बनाता और गाँव में बेचता।
इन पैसों से उसने अपनी नई किताबें खरीदीं।

धीरे-धीरे उसकी मेहनत और लगन रंग लाने लगी।
गाँव के लोगों ने भी उसके जज़्बे को देख कर उसकी पढ़ाई में मदद करनी शुरू कर दी।

कुछ वर्षों बाद—
वही आरव अपने जिले का टॉपर बना और एक बड़ी कंपनी में इंजीनियर बन गया।


कहानी की सीख (Moral of the Story)

1. परिस्थितियाँ आपको रोक सकती हैं, लेकिन आपकी सोच नहीं।

2. हर अंधेरा एक नई रोशनी की शुरुआत होता है।

3. मेहनत, विश्वास और लगन से असंभव भी संभव बन जाता है।

4. हार को अंत नहीं, नई शुरुआत समझें।


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